11/02/2026
श्रीरामचरितमानस
"प्रथम सोपान"
बालकांड
श्लोक - ७
"नानापुराणनिगमागमसम्मतं यद्
रामायणे निगदितं क्वचिदन्यतोऽपि।
स्वान्तःसुखाय तुलसी रघुनाथगाथा
भाषानिबन्धमतिमंजुलमातनोति॥७॥ "
"नाना प्रकार के पुराणों, वेदों और आगमों से सम्मत तथा रामायण में अन्यत्र भी जो वर्णित है, उस रघुनाथजी की कथा को तुलसीदास जी अपनी अंतरात्मा के सुख के लिए अत्यंत मनोहर भाषा-काव्य में विस्तार कर रहे हैं। । ७ ।