वैदिक प्रेरणा और विचार

  • Home
  • India
  • Noida
  • वैदिक प्रेरणा और विचार

वैदिक प्रेरणा और विचार !! ॐ | वेद | धर्म | संस्कार !!
धर्म, ज्ञान और संस्कारों की यात्रा -सनातन धर्म की वैदिक प्रेरणाओं एवं जीवनोपयोगी विचारों के साथ

श्रीरामचरितमानस"प्रथम सोपान"बालकांडश्लोक - ७"नानापुराणनिगमागमसम्मतं यद्रामायणे निगदितं क्वचिदन्यतोऽपि।स्वान्तःसुखाय तुलस...
11/02/2026

श्रीरामचरितमानस
"प्रथम सोपान"
बालकांड
श्लोक - ७

"नानापुराणनिगमागमसम्मतं यद्
रामायणे निगदितं क्वचिदन्यतोऽपि।
स्वान्तःसुखाय तुलसी रघुनाथगाथा
भाषानिबन्धमतिमंजुलमातनोति॥७॥ "

"नाना प्रकार के पुराणों, वेदों और आगमों से सम्मत तथा रामायण में अन्यत्र भी जो वर्णित है, उस रघुनाथजी की कथा को तुलसीदास जी अपनी अंतरात्मा के सुख के लिए अत्यंत मनोहर भाषा-काव्य में विस्तार कर रहे हैं। । ७ ।

श्रीमद्भगवद्गीताअध्याय- १ सैन्य – दर्शन!! श्लोक – ८   !!भवान्भीष्मश्च कर्णश्च कृपश्च समितिञ्जयः ।अश्वत्थामा विकर्णश्च सौ...
11/02/2026

श्रीमद्भगवद्गीता
अध्याय- १ सैन्य – दर्शन

!! श्लोक – ८ !!

भवान्भीष्मश्च कर्णश्च कृपश्च समितिञ्जयः ।
अश्वत्थामा विकर्णश्च सौमदत्तिस्तथैव च ।। १-८ ।।

“इस सेना में सदा विजयी रहने वाले आप (भीष्म पितामह), द्रोणाचार्य, कर्ण, कृपाचार्य, अश्वत्थामा, विकर्ण तथा सोमदत्त का पुत्र भूरिश्रवा आदि महारथी योद्धा हैं।“

“Our side includes yourself, Bheeshma, Karna, Krupa who has won
many wars, Ashwatthama, Vikarna and Bhoorishravas, son of Somadatta.”

कर्म पर ही तुम्हारा अधिकार है, उसके फलों में कभी नहीं। इसलिए, फल की इच्छा के बिना धर्मसंगत कर्म करें। यही सनातन धर्म का ...
11/02/2026

कर्म पर ही तुम्हारा अधिकार है, उसके फलों में कभी नहीं। इसलिए, फल की इच्छा के बिना धर्मसंगत कर्म करें। यही सनातन धर्म का सर्वोच्च विज्ञान ।।

You control only your actions, never their outcomes. Therefore, act righteously without attachment to results. This principle constitutes the highest wisdom of Sanātana Dharma.

श्लोक - ६यन्मायावशवर्ति विश्वमखिलं ब्रह्मादिदेवासुरा,यत्सत्त्वादमृषैव भाति सकलं रज्जौ यथाहेर्भ्रमः ।यत्पादप्लवमेकमेव हि ...
07/02/2026

श्लोक - ६

यन्मायावशवर्ति विश्वमखिलं ब्रह्मादिदेवासुरा,
यत्सत्त्वादमृषैव भाति सकलं रज्जौ यथाहेर्भ्रमः ।
यत्पादप्लवमेकमेव हि भवाम्भोधेस्तितीर्षावतां,
वन्देऽहं तमशेषकारणपरं रामाख्यमीशं हरिम् ॥ ६ ॥

"जिनकी माया के वशीभूत यह सम्पूर्ण विश्व है; जिनकी सत्ता से यह जगत सत्य की तरह प्रतीत होता है, और जिनका चरण-कमल ही इस संसार-रूपी सागर से पार जाने की इच्छा रखने वालों के लिए एकमात्र नौका है; उन समस्त कारणों के कारण, 'राम' नाम से पुकारे जाने वाले परमेश्वर श्रीहरि की मैं वंदना करता हूँ"।६।

श्रीमद्भगवद्गीताअध्याय- १ सैन्य – दर्शन!! श्लोक – ७  !!अस्माकं तु विशिष्टा ये तान्निबोध द्विजोत्तम ।नायका मम सैन्यस्य सं...
07/02/2026

श्रीमद्भगवद्गीता
अध्याय- १ सैन्य – दर्शन
!! श्लोक – ७ !!
अस्माकं तु विशिष्टा ये तान्निबोध द्विजोत्तम ।
नायका मम सैन्यस्य संज्ञार्थं तान्ब्रवीमि ते ॥ १- ७ ॥

"हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! हमारे पक्ष में भी जो मुख्य हैं, उन्हें आप समझ लीजिये। आपकी जानकारी के लिए मेरी सेना के जो-जो सेनापति हैं, उन्हें मैं आपको बताता हूँ।"

“O Drona! Superior among the wise men! Now I will enumerate the great warriors from our side. So, please listen with attention.”

सनातन हिंदू धर्म वह दीप है जो अज्ञान के अंधकार में ज्ञान की रोशनी फैलाता है। यह धर्म सीमाओं में नहीं बंधता, बल्कि चेतना ...
07/02/2026

सनातन हिंदू धर्म वह दीप है जो अज्ञान के अंधकार में ज्ञान की रोशनी फैलाता है। यह धर्म सीमाओं में नहीं बंधता, बल्कि चेतना को मुक्त करना सिखाता है।

Sanatan Hindu Dharma is the lamp that spreads the light of knowledge in the darkness of ignorance.
This faith is not bound by limitations; instead, it teaches the liberation of consciousness.

सनातन भाव"वसुधैव कुटुम्बकम्: पूरी दुनिया एक परिवार है। यह विचार केवल सनातन संस्कृति ही दे सकती है। 🌍✨""Vasudhaiva Kutumb...
05/02/2026

सनातन भाव

"वसुधैव कुटुम्बकम्: पूरी दुनिया एक परिवार है। यह विचार केवल सनातन संस्कृति ही दे सकती है। 🌍✨"

"Vasudhaiva Kutumbakam: The whole world is one family. Only Sanatan culture can give this idea. 🌍✨"

श्रीमद्भगवद्गीताअध्याय- १ सैन्य – दर्शन!! श्लोक – ६  !!युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च वीर्यवान्।सौभद्रो द्रौपदेयाश्च...
05/02/2026

श्रीमद्भगवद्गीता
अध्याय- १ सैन्य – दर्शन
!! श्लोक – ६ !!
युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च वीर्यवान्।
सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथाः ॥ १-६ ॥
"और पराक्रमी युधामन्यु तथा बलवान उत्तमौजा, सुभद्रा का पुत्र (अभिमन्यु) और द्रौपदी के पाँचों पुत्र—ये सभी निश्चय ही 'महारथी' हैं।"

Yudhamanyu, the brave warrior, Uttamowja, the strong warrior,
Abhimanyu, son of Subhadra, and sons of Draupadi are also here. They too
are Maharathas.

श्रीरामचरितमानस"प्रथम सोपान"बालकांडश्लोक - ५उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं क्लेशहारिणीम्।सर्वश्रेयस्करीं सीतां नतोऽहं रामवल्लभा...
05/02/2026

श्रीरामचरितमानस
"प्रथम सोपान"
बालकांड
श्लोक - ५

उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं क्लेशहारिणीम्।
सर्वश्रेयस्करीं सीतां नतोऽहं रामवल्लभाम्॥ ५॥

"जो (सीता जी) सृष्टि की उत्पत्ति, पालन और संहार (उद्भव-स्थिति-संहार) करने वाली हैं, जो कष्टों को हरने वाली (क्लेशहारिणी) हैं, जो सब प्रकार का कल्याण करने वाली (सर्वश्रेयस्करी) हैं, उन राम की प्रियतमा सीता जी को मैं नमस्कार करता हूँ।"। ५।

यमराज को रोकने के लिए अंगूठी की युक्ति: ! 🚩💥 जय 💥 श्री 💥 राम 💥 जय 💥 हनुमान 💥जब श्री राम के पृथ्वी छोड़ने का समय आया, तो व...
04/02/2026

यमराज को रोकने के लिए अंगूठी की युक्ति: ! 🚩
💥 जय 💥 श्री 💥 राम 💥 जय 💥 हनुमान 💥
जब श्री राम के पृथ्वी छोड़ने का समय आया, तो वे जानते थे कि हनुमान जी के रहते यमराज उन तक नहीं पहुँच सकते।
उन्होंने अपनी अंगूठी पाताल की एक दरार में गिरा दी और हनुमान जी को उसे लाने भेजा। जब हनुमान जी पाताल (नागलोक) पहुँचे, तो वहाँ हजारों अंगूठियाँ देखकर उन्हें समझ आया कि यह सब श्री राम की लीला थी ताकि वे
यमराज को अपना कार्य करने दें।

💥 बोलो 💥 जय 💥 श्री 💥 राम 💥 जय 💥 हनुमान 💥

श्रीरामचरितमानस"प्रथम सोपान"बालकांडश्लोक - ४"सीता-राम-गुण-ग्राम-पुण्यारण्य-विहारिणौ ।वन्दे विशुद्ध-विज्ञानौ कवीश्वर-कपीश...
03/02/2026

श्रीरामचरितमानस
"प्रथम सोपान"
बालकांड
श्लोक - ४

"सीता-राम-गुण-ग्राम-पुण्यारण्य-विहारिणौ ।
वन्दे विशुद्ध-विज्ञानौ कवीश्वर-कपीश्वर ॥ ४ ॥"

"श्री सीता-राम जी के पवित्र गुणों के समूह रूपी पावन वन (पुण्यारण्य) में विहार करने वाले, परम शुद्ध ज्ञान (विशुद्ध विज्ञान) से युक्त, कवीश्वरों (कवियों) में श्रेष्ठ वाल्मीकि जी और कपीश्वरों (वानरों) में श्रेष्ठ हनुमानजी को मैं वंदना करता हूँ"

श्रीमद्भगवद्गीताअध्याय- १ सैन्य – दर्शन!! श्लोक – ५  !!धृष्टकेतुश्चेकितानः काशिराजश्च वीर्यवान्।पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब...
03/02/2026

श्रीमद्भगवद्गीता
अध्याय- १ सैन्य – दर्शन
!! श्लोक – ५ !!
धृष्टकेतुश्चेकितानः काशिराजश्च वीर्यवान्।
पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुङ्गवः॥ ५॥

(दुर्योधन ने कहा) "धृष्टकेतु, चेकितान तथा पराक्रमी काशिराज, पुरुजित, कुन्तिभोज और मनुष्यों में श्रेष्ठ शैब्य (ये सभी वीर सेना में हैं)।

Other brave warriors include Drushtaketu, Chekitana, Kashiraja who are extraordinarily strong, Purujit, Kuntibhoja and Shybhya who are
superior among men.

Address

Noida

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when वैदिक प्रेरणा और विचार posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share