03/04/2026
*बिना तिरंगे के "101" फिट के पोल की व्यथा*,,
शब्दों की संसद में,,
*मेरे शहर में सत्ता तो एक बार पलटी गई*,,
*लेकिन मेरे ऊपर टंगा हुआ तिरंगा कितनी बार पलटा गया?*
*क्यों?*
*आज फिर उतर गया तिरंगा कह रहे हैं,*
*खंडित हो गया?*,,
*मैं तो बस लोहे का एक पोल हूं*,,
*निशब्द*,,
*पर हर बार जब तिरंगा उतरता है मेरे भीतर भी कुछ चटकता है*,,
*जंग सिर्फ बाहर नहीं लगती,, अंदर भी लगती है*,,
*मैं तो आज भी "तना खड़ा हूं* ,,
*लेकिन बिना तिरंगे के*,,
*जैसे निर्वस्त्र ?*
*मैं लोहे का पोल होते हुए भी पूछना चाहता हूं* ,,
*क्यों तिरंगा बार-बार खंडित हो जाता है?*
*क्या हवाएं तेज है*,,
*या*,,
*नियत हल्की?*
*क्या धागे कमजोर है*,,
*या संकल्प?*
*तिरंगा तो तीन रंगों का है*,,
*केसरिया त्याग का*,,
*सफेद सत्य का*,,
*हरा विश्वास का*,,
*पर शायद हमने त्याग को भाषणों में*,,
*सत्य को पोस्टरों में,,
*और विश्वास को ठेके में बदल दिया है?*
*अगले तिरंगे का इंतजार कर रहा हूं*,,
*फिर वही फोटो*,,
*वही नारे*,,
*वही तालियां*,,
*पर कोई यह नहीं पूछता तिरंगा बार-बार खंडित क्यों हो रहा है?*
*और हर बार सम्मान के नाम पर हमारी जिम्मेदारियां क्यों उतर जाती है?*
*मैं लोहे का पोल हूं*,,
*न बोल सकता हूं,, न चल सकता हूं*,,
*फिर भी पूछ रहा हूं?*
*तिरंगा खंडित केवल हवाओं के थपेड़ों से नहीं होता*,,
*खंडित होता है लापरवाही से*,,
*हमारी दिखावटी श्रद्धा से*,,
*और हमारे मौसमी राष्ट्र प्रेम से*,,
*मैं तो लोहे का एक पोल हूं*,,
*फिर भी मुझे तिरंगे के उतरने का दर्द होता है*,,
*लेकिन उससे भी ज्यादा दर्द उसके बार-बार खंडित होने का*,,
*क्योंकि तिरंगे का कपड़ा बार-बार तब खंडित होता है*,
*जब उसे संभालने वाले हाथ ढीले पड़ जाते हैं?*
*मैं तो बस लोहे का एक पोल*,,
*निशब्द*,,,,
*मैं तो आज भी इतना खड़ा हूं,, अगले तिरंगे का इंतजार कर रहा हूं?*
*लेकिन इस प्रश्न के साथ?*,,
*अगर देश इतना मजबूत है तो "प्रतिक" कमजोर क्यों?*
*अगर नियत साफ है तो, धागे इतने ढीले क्यों?*
*मैं लोहे का हूं इसलिए चुप हूं*,,
जिस दिन जनता ने मेरी तरह तनकर खड़ा होना सीख लिया?
*उस दिन तिरंगा शायद ऊंचाई पर ही नहीं अखंड अनवरत लहराएगा*,,
*मेरे ऊपर टंगा तिरंगा आज फिर उतर गया*,,
*कारण वही लिखा गया*,,
*खंडित?*
*खंडित शब्द छोटा है*,,
*पर शर्म बड़ी होनी चाहिए?*
*मैं वही पोल हूं जिसे 101 फीट की ऊंचाई पर खड़ा कर दिया गया है* ,,
*लेकिन आज मुझे मेरी ऊंचाई पर भी शक है?*
*कि क्या मैं हकीकत में 101 फीट का हूं?*
*कृपया मेरी ऊंचाई की भी एक बार पैमाइश कर लि जाए?*
शब्दों के संसद,,
*राजीव ओझा✍️*
*9414630547*