03/08/2025
राजस्थान के एक छोटे से गाँव "सीतानगर" में एक पुरानी हवेली थी, जिसे लोग "काली हवेली" कहते थे। कहते हैं कि वहाँ रात को अजीब आवाज़ें आती थीं — ज़ंजीरों की खनक, किसी औरत के रोने की आवाज़, और कभी-कभी हल्की सी हँसी भी।
गाँव वालों का मानना था कि उस हवेली में कोई आत्मा है जो हर अमावस की रात को ज़िंदा हो उठती है।
एक दिन, शहर से एक युवा पत्रकार राहुल वहाँ आया। वो इस हवेली के रहस्य को उजागर करना चाहता था। गाँव के बुज़ुर्गों ने उसे मना किया, लेकिन राहुल नहीं माना। कैमरा, टॉर्च और रिकॉर्डर लेकर वो रात को अकेले हवेली में घुस गया।
हवेली में घुसते ही ठंडी हवा चली और दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया।
भीतर सन्नाटा था। दीवारों पर पुराने खून के निशान थे। अचानक, राहुल को सीढ़ियों से किसी के चलने की आवाज़ आई। उसने कैमरा घुमाया, लेकिन वहाँ कोई नहीं था।
जैसे ही वो ऊपर पहुँचा, उसे एक पुरानी डायरी मिली। उस पर लिखा था:
"मैं कामिनी हूँ... मुझे मेरे ही पति ने इस हवेली में ज़िंदा दफना दिया था। मेरी आत्मा अब भी न्याय चाहती है।"
तभी एक तेज़ चीख़ गूंजी — और राहुल का कैमरा अपने आप रिकॉर्डिंग करने लगा। स्क्रीन पर एक सफेद साड़ी में औरत दिखाई दी, जिसके चेहरे पर नज़र नहीं थी।
राहुल बेहोश हो गया।
सुबह गाँव वालों ने हवेली के बाहर राहुल का कैमरा और डायरी पाई — लेकिन राहुल खुद कभी नहीं मिला।
आज भी, अगर कोई उस हवेली के पास जाए, तो कैमरे में वो सफेद साड़ी वाली औरत दिखती है... और कानों में गूंजती है उसकी वही आख़िरी लाइन:
"मुझे इंसाफ़ दो..."