कभी खुशी कभी गम

कभी खुशी कभी गम Positive and Negative Daily incidents Happens in Society.

कलंकित हुआ रिश्ता ससुर और बहू ने मिलकर की सास की हत्या।
18/06/2026

कलंकित हुआ रिश्ता ससुर और बहू ने मिलकर की सास की हत्या।

 ा_होनहार_बेटा_गया..भरतपुर। दिल्ली के साकेत इलाके में शनिवार को एक दर्दनाक हादसे में पांच मंजिला इमारत गिरने से पांच लोग...
02/06/2026

ा_होनहार_बेटा_गया..
भरतपुर। दिल्ली के साकेत इलाके में शनिवार को एक दर्दनाक हादसे में पांच मंजिला इमारत गिरने से पांच लोगों की मौत हो गई, जिसमें भरतपुर के रूपवास कस्बे का 25 वर्षीय होनहार युवक कपिल लवानिया भी शामिल है। कपिल अपने परिवार का इकलॉता बेटा था और महज तीन महीने पहले ही उसका चयन मुंबई के प्रतिष्ठित भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर में हुआ था, जहां वह इंटरव्यू में टॉप-10 में रहा था। पिछले साल 2025 में बीटेक पूरी करने के बाद कपिल ने इस साल गेट (GATE) परीक्षा में देशभर में 57वीं रैंक हासिल की थी। उसकी सरकारी नौकरी की जॉइनिंग प्रक्रिया और कुछ जरूरी कागजी कार्रवाई चल रही थी, जिसके सिलसिले में वह दिल्ली के साकेत इलाके में रुका हुआ था। शनिवार को वह साकेत में मेडिकल छात्रों की एक कैंटीन में खाना खाने गया था, तभी अचानक पांच मंजिला इमारत भरभराकर ढह गई और वह मलबे में दब गया। रेस्क्यू टीम ने उसे मलबे से निकालकर अस्पताल पहुंचाया, जहां से गंभीर हालत में उसे एम्स रेफर किया गया, लेकिन एम्स ले जाते समय एम्बुलेंस में ही बीपी लो होने के कारण उसने दम तोड़ दिया। रूपवास में खाद-बीज का व्यवसाय करने वाले पिता राजेश लवानिया और पढ़ाई कर रही छोटी बहन सहित पूरे परिवार में जहां कपिल की सफलता को लेकर खुशियों का माहौल था, वहीं इस हादसे ने सब कुछ छीन लिया। रविवार को जब कपिल का शव दिल्ली से रूपवास स्थित घर पहुंचा, तो परिजनों की चीख-पुकार से पूरा माहौल गमगीन हो गया और माता-पिता बेसुध हो गए, जिसके बाद नम आंखों से उसका अंतिम संस्कार किया गया।

एक तरफा प्यार में, मां ने शादी से मना किया, तो तड़पा-तड़पा कर मासूम को 8 बार जमीन पर पटका और ले ली जान। देखें पुलिस ने क...
02/06/2026

एक तरफा प्यार में, मां ने शादी से मना किया, तो तड़पा-तड़पा कर मासूम को 8 बार जमीन पर पटका और ले ली जान। देखें पुलिस ने कैसे सिखाया सबक! 👇पैर में लगी गोली! 🔥

संभोग वह इकलौती रस्सी है जिससे बीवी अपने पति को बाँधकर रख सकती है। ‌जितना ज्यादा कोई मर्द सम्भोग का शौक़ीन होता है, उतना...
24/05/2026

संभोग वह इकलौती रस्सी है जिससे बीवी अपने पति को बाँधकर रख सकती है। ‌जितना ज्यादा कोई मर्द सम्भोग का शौक़ीन होता है, उतना ही वह बीवी के स्पर्श का आदी हो जाता है। नशेड़ी हमेशा नशा देने वाले का ग़ुलाम होता है।
लेकिन मुश्किल तब पैदा होती है जब औरत इस नशे को अपना हथियार बनाने की बजाय इसे रोककर पति को आज़माने लगती है। वह समझती है कि बच्चे हो चुके, घर बस चुका, अब पति कहीं नहीं जाएगा। मगर यही सबसे बड़ी भूल होती है...
बीवी जब बार-बार पति की शारीरिक प्यास को टालती है, नखरे दिखाती है, तो पति को बीवी ज़हर लगने लगते हैं। यह रिश्ता धीरे-धीरे खोखला होने लगता है।
ज़्यादातर औरतें बच्चों के बाद समझती हैं कि अब उनका पति कहीं नहीं जाएगा, अब तो वह सुरक्षित हो चुकी हैं। लेकिन यही ग़लतफ़हमी अक्सर घरों की बर्बादी की शुरुआत बन जाती है।
दूसरी शादी करने वाले मर्दों की अक्सर यही औरतें बीवियाँ होती हैं जिन्होंने रिश्ते को सिर्फ़ ज़िम्मेदारी समझकर निभाया, मोहब्बत और हवस से महरूम रखा। मर्द को रोका जा सकता है, बाँधा जा सकता है... लेकिन सिर्फ़ तब, जब उसकी प्यास बीवी के स्पर्श से बुझे। वरना वह प्यास कहीं और से बुझाने का रास्ता खुद बना लेता है।
औरतें अगर सच में अपने पति को जोड़े रखना चाहती हैं पति की असली मंज़िल बन जाएँ।
घर सिर्फ़ दुआओं से नहीं चलते, बल्कि उन शारीरिक हक़ीक़तों से बंधे होते हैं जिन्हें अक्सर झिझक या शर्म के नाम पर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।
अगर बीवी खुद को पति की ज़रूरत नहीं, सिर्फ़ फ़र्ज़ समझने लगे... तो एक दिन पति भी फ़र्ज़ अदा करके किसी और की हवस बनने निकल पड़ता है

Absolutely correct
But people don't accept this reality

06/05/2026

#पोर्न_एक_खामोश_नशा; जो पुरुषों को अंदर से खोखला कर रहा है!

आज के डिजिटल युग में, एक ऐसा खामोश और खतरनाक नशा है जो पुरुषों को बिना एहसास कराए अंदर से नष्ट कर रहा है, वह है पोर्न। यह केवल एक बुरी आदत नहीं है, बल्कि एक ऐसा धीमा जहर है जो चुपचाप आपकी वास्तविकता को निगल रहा है। यह एक ऐसा नशा है जो न केवल आपके शरीर को, बल्कि आपके मन और आपकी पूरी शख्सियत को खोखला कर देता है। इस नशे की लत से भी आगे इसके दुष्प्रभाव इतने गहरे हैं कि इंसान को अपनी बर्बादी का तब तक पता नहीं चलता, जब तक कि वह पूरी तरह से इसके जाल में न फंस जाए।

▪️यह लत सबसे पहला प्रहार एक पुरुष के #पौरुष (Masculinity) पर करती है। पौरुष का अर्थ केवल शारीरिक बल नहीं है, बल्कि यह एक पुरुष का वह वास्तविक सार है जो उसे जिम्मेदारी, अनुशासन और अपने आदर्शों पर अडिग रहने का साहस देता है। इसमें आत्म-नियंत्रण, आत्म-सम्मान और आत्मनिर्भरता जैसे गुण शामिल होते हैं। जिस व्यक्ति में आत्म-अनुशासन नहीं होता, उसका अपने जीवन पर कोई नियंत्रण नहीं रह जाता। जो खुद का सम्मान नहीं कर सकता, दुनिया उसका सम्मान कभी नहीं करती, और न ही कोई ऐसे व्यक्ति पर भरोसा करता है जो खुद पर निर्भर नहीं रह सकता। अक्सर पुरुष इस लत को यह कहकर सही ठहराने की कोशिश करते हैं कि मैं जब चाहूं इसे छोड़ सकता हूं, मैं हमेशा नहीं देखता, या मैं सिंगल हूं तो इसमें क्या बुराई है।
लेकिन असलियत में, ये ठीक वही बहाने हैं जो एक नशे का आदी व्यक्ति अपनी लत को छिपाने के लिए बनाता है।

▪️इसके अलावा, यह लत इंसान को एक झूठी उपलब्धि का एहसास कराती है। इस प्रक्रिया में आपको लगता है कि आपने कोई सुख या मुकाम पा लिया है, जबकि हकीकत में आपने कुछ भी हासिल नहीं किया होता। इसमें कोई वास्तविक इनाम या सफलता नहीं है, लेकिन इसके बदले में आपकी बहुत सारी बहुमूल्य ऊर्जा खर्च हो जाती है। आपके शरीर और दिमाग की वह ऊर्जा जो जीवन में कुछ बड़ा, रचनात्मक और सार्थक हासिल करने में लगनी चाहिए थी, वह बिना किसी उद्देश्य के पूरी तरह व्यर्थ हो जाती है।
रिश्तों और वास्तविकता के प्रति विकृत नजरिया
इसका एक और गंभीर दुष्प्रभाव आपके मस्तिष्क की कार्यप्रणाली (Brain rewiring) पर पड़ता है। यह सेक्स, महिलाओं और रिश्तों के प्रति आपके पूरे नजरिए को विकृत कर देता है। आप अनजाने में ही लोगों से जुड़ने की स्वाभाविक क्षमता खोने लगते हैं और आपका दिमाग एकदम गलत दिशा में सोचने लगता है। सबसे दुखद बात यह है कि इसके कारण एक समय बाद आपको किसी से सच्चा प्यार करने या सही कारणों से किसी रिश्ते में रहने में भारी संघर्ष करना पड़ सकता है। आपकी स्वाभाविक यौन ऊर्जा कमजोर पड़ने लगती है, जो कोई मामूली बात नहीं बल्कि पौरुष के लिए एक बहुत बड़ा झटका है।

▪️यह आपके मानसिक स्वास्थ्य को पूरी तरह बर्बाद कर देता है। इस आदत के साथ शर्मिंदगी और अपराधबोध का आना तय है। आप इसे अकेले में करते हैं, जिससे आप खुद को सबसे अलग-थलग कर लेते हैं। आपके मन में हमेशा यह डर और घबराहट बनी रहती है कि कहीं कोई आपको पकड़ न ले या आपका सच जान न ले। यह डर आपको हमेशा एक बचाव और पलायन की स्थिति में रखता है, जिससे आपका आत्मविश्वास और मानसिक शांति पूरी तरह छिन जाती है।

▪️पोर्न एक ऐसा साइलेंट किलर है जो आपकी ऊर्जा, आपके रिश्तों, आपके पौरुष और आपके मानसिक स्वास्थ्य को दीमक की तरह चाट रहा है। इसे सामान्य समझकर इसके बचाव में तर्क देना खुद को धोखा देने के समान है। यह समझना बेहद जरूरी है कि सच्ची स्वतंत्रता इस लत को सही ठहराने में नहीं, बल्कि इससे बाहर निकलकर अपने जीवन और अपनी ऊर्जा का नियंत्रण वापस अपने हाथों में लेने में है। इस सच्चाई को स्वीकार करना ही इस अंधेरे से बाहर निकलने और एक बेहतर, अनुशासित जीवन की ओर बढ़ने का पहला कदम है

06/05/2026

मेरा नाम विवेक शर्मा है। उम्र 32 साल। लोग जब पूछते हैं, तुम क्या करते हो, तो मैं कहता हूँ, किराना दुकान चलाता हूँ। वे हँसते हैं, क्योंकि उन्हें पता है मैं आईआईटी बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस में गोल्ड मेडलिस्ट था, और मेरे पास सैन फ्रांसिस्को की एक कंपनी का ऑफर लेटर आज भी अलमारी में रखा है, जिस पर सैलरी लिखी है 2,40,000 डॉलर सालाना।

मैंने वह लेटर कभी फाड़ा नहीं, पर कभी इस्तेमाल भी नहीं किया।

कहानी 1998 से शुरू होती है, कानपुर के किदवई नगर में। दो कमरे का घर, ऊपर टीन। पापा रेलवे में क्लर्क, माँ ट्यूशन पढ़ातीं। मैं इकलौता बेटा। पापा की सैलरी 8,000 रुपये। माँ की ट्यूशन से 2,000। हम मिडिल क्लास भी नहीं थे, लोअर मिडिल।

पर पापा का एक सपना था, बेटा बड़ा आदमी बने। उन्होंने कभी मुझसे नहीं कहा डॉक्टर बन, इंजीनियर बन। वह सिर्फ कहते, बेटा, जितना पढ़ना है पढ़, पैसे की चिंता मत कर।

मैं पढ़ता गया। दसवीं में 95 प्रतिशत, बारहवीं में 97। कोचिंग की फीस 1 लाख थी। पापा ने पीएफ निकाला। माँ ने अपनी चूड़ियाँ बेचीं। मैं कोटा गया। दो साल पंखे के नीचे पढ़ा, मच्छर खाए। 2012 में रिजल्ट आया, AIR 147। आईआईटी बॉम्बे, कंप्यूटर साइंस।

जिस दिन लेटर आया, पापा मिठाई का डिब्बा ले कर पूरे मोहल्ले में बाँट आए। माँ रो पड़ी। बोली, अब मेरा बेटा अमेरिका जाएगा।

आईआईटी में मैं उड़ा। कोडिंग, हैकाथॉन, इंटर्नशिप। तीसरे साल में गूगल समर इंटर्न, 1 लाख स्टाइपेंड। मैंने पहली सैलरी से पापा को फोन दिलाया, माँ को वॉशिंग मशीन। पापा ने फोन पर कहा, बेटा, अब तो रिटायरमेंट में आराम करूँगा।

फाइनल ईयर में प्लेसमेंट। मैं दिन रात तैयारी करता। दिसंबर 2015, मेरा इंटरव्यू हुआ एक कंपनी से, नाम था स्ट्राइप जैसी पेमेंट स्टार्टअप, बेस सैन फ्रांसिस्को। चार राउंड, आखिरी में सीटीओ ने कहा, वी वांट यू। ऑफर आया, 240k डॉलर, H1B, रीलोकेशन।

मैंने हॉस्टल में चिल्ला कर दोस्तों को बताया। रात को पापा को फोन किया। पापा चुप रहे, फिर बोले, बेटा, बहुत बड़ी बात है। माँ ने कहा, पासपोर्ट बनवा ले।

मैंने टिकट देखना शुरू किया, अगस्त 2016 जॉइनिंग।

मार्च 2016 में होली पर घर आया। पापा कमजोर लग रहे थे। खाँसी। मैंने कहा, डॉक्टर को दिखाओ। बोले, कुछ नहीं, ठंड लग गई। माँ भी थकी थकी। मैंने सोचा, उम्र है।

अप्रैल में फोन आया, माँ का। पापा गिर गए, अस्पताल में। मैं भागा। डॉक्टर ने कहा, लंग्स में इंफेक्शन, साथ में हार्ट की प्रॉब्लम। एंजियोप्लास्टी करनी पड़ेगी। खर्च, 3 लाख।

पापा के पास मेडिकल था, पर आधा ही कवर। मैंने अपनी इंटर्नशिप के पैसे, 2 लाख, निकाल कर दिए। ऑपरेशन हुआ। पापा बच गए।

मैं वापस बॉम्बे गया, फाइनल प्रोजेक्ट। मई में फिर फोन, माँ को चक्कर आए। जांच हुई, ब्रेस्ट कैंसर, स्टेज 2। डॉक्टर ने कहा, कीमो शुरू करो, 6 साइकल, हर साइकल 80 हजार। कुल 5 लाख, प्लस सर्जरी।

मैं सुन्न। पापा रिटायर हो चुके थे, पेंशन 12 हजार। घर में सेविंग खत्म। मैंने दोस्तों से उधार माँगा, 1 लाख मिला। बाकी।

जून में मैं घर बैठा था, ऑफर लेटर हाथ में। वीजा इंटरव्यू 15 जुलाई को था। फ्लाइट 10 अगस्त की। माँ की पहली कीमो 20 जून को।

मैंने पापा से कहा, मैं लोन लेता हूँ। पापा बोले, कौन देगा, घर गिरवी रखना पड़ेगा। मैंने कहा, रख देंगे। पापा ने मना किया, बोले, ये घर तेरी माँ की निशानी है।

उस रात मैं छत पर बैठा। आसमान में प्लेन जा रहा था। मैंने सोचा, यही प्लेन मुझे ले जाएगा। दूसरी तरफ माँ नीचे दर्द में।

मैंने अपने मेंटर को मेल किया, क्या जॉइनिंग डिफर हो सकती है, 6 महीने। रिप्लाई आया, सॉरी विवेक, वी नीड पीपल नाउ। यू कैन रीअप्लाई नेक्स्ट ईयर।

मैंने फिर मेल किया, रिमोट पॉसिबल। नो।

14 जुलाई की रात। वीजा इंटरव्यू कल। माँ की दूसरी कीमो परसों। पापा दवाई लेने गए थे, लौटे तो पर्ची गिर गई, झुक कर उठा नहीं पाए। मैंने उठाई। उस वक्त समझ आया, मैं अगर चला गया तो ये दोनों कैसे रहेंगे।

पापा रिटायर्ड, बीमार। माँ कीमो पर। कोई भाई बहन नहीं। रिश्तेदार मदद नहीं करते। कौन अस्पताल ले जाएगा, कौन दवाई लाएगा, कौन रात को पानी देगा।

मैंने सुबह वीजा इंटरव्यू कैंसिल किया। कंपनी को मेल लिखा, थैंक यू फॉर ऑफर, ड्यू टू फैमिली मेडिकल इमरजेंसी आई एम अनेबल टू जॉइन।

दोस्तों ने फोन किया, पागल है क्या, 1.6 करोड़ की जॉब छोड़ रहा है। मैंने कहा, हाँ।

माँ को नहीं बताया। पापा को बताया। वह चुप रहे, फिर बोले, बेटा तेरा करियर। मैंने कहा, करियर फिर बन जाएगा, आप फिर नहीं मिलोगे।

मैंने कानपुर में ही नौकरी ढूंढी। एक लोकल सॉफ्टवेयर कंपनी, सैलरी 35 हजार। मैंने जॉइन कर ली। सुबह 9 से शाम 6 ऑफिस, शाम को अस्पताल। कीमो में माँ के बाल गए, वह रोती। मैं विग ले आया। पापा की दवाई टाइम पर देता।

2016 से 2018, दो साल ऐसे निकले। माँ की सर्जरी हुई, रिकवरी हुई। कैंसर रिमिशन में आया। पापा की तबीयत स्थिर। पर पैसे खत्म। मैंने लोन लिया, 7 लाख।

2018 में कंपनी बंद हो गई। मैं बेरोजगार। इंटरव्यू दिए, बेंगलुरु से ऑफर आया, 18 लाख। मैंने मना किया। पापा बोले, जा बेटा। मैंने कहा, अब नहीं छोड़ सकता। माँ को हर तीन महीने चेकअप, पापा को डायबिटीज। कौन देखेगा।

दोस्त बोले, तू अपना करियर मार रहा है। मैंने कहा, करियर मेरा है, माँ बाप भी मेरे।

मैंने घर के नीचे छोटी सी दुकान खोली, पापा के नाम पर, शर्मा जनरल स्टोर। कंप्यूटर छोड़ कर दाल चावल बेचने लगा। पहले दिन शर्म आई। आईआईटी का लड़का दुकान पर। फिर एक आंटी आईं, बोलीं, बेटा तुम्हारी माँ ने मुझे पढ़ाया था, तुम दुकान खोलो, हम यहीं से लेंगे।

धीरे धीरे दुकान चली। मैं सुबह 6 बजे होलसेल मंडी जाता, सामान लाता, दिन में दुकान, रात को फ्रीलांस कोडिंग। 500 डॉलर की वेबसाइट बनाता।

2019 में माँ पूरी तरह ठीक। डॉक्टर ने कहा, क्लियर। उस दिन मैं दुकान बंद कर के मंदिर गया। प्रसाद चढ़ाया। घर आया तो पापा बोले, बेटा, तूने हमारे लिए सब छोड़ दिया। मैंने कहा, छोड़ा नहीं, बदला है।

2020 लॉकडाउन। दुकान एसेंशियल में खुली। लोगों को राशन चाहिए था। मैंने होम डिलीवरी शुरू की। साइकिल पर जाता। पापा हिसाब लिखते। माँ पैकिंग करती। उस लॉकडाउन में हमने 2 लाख कमाए। मैंने लोन का आधा चुका दिया।

2021 में मैंने दुकान के साथ एक छोटा कंप्यूटर क्लास शुरू किया, बच्चों को कोडिंग सिखाने। फीस 500 महीना। 20 बच्चे आए। मुझे फिर से कोडिंग का मजा आया।

2022 में एक बच्चा, अंश, जो मेरे पास पढ़ता था, उसने नेशनल ओलंपियाड जीता। न्यूज में आया, 'कानपुर के किराना वाले आईआईटीयन से सीख कर जीता'। वह आर्टिकल वायरल हुआ।

उसी हफ्ते मुझे मेल आया, स्ट्राइप के उसी सीटीओ से। लिखा था, विवेक, आई सॉ योर स्टोरी। वी आर ओपनिंग इंडिया ऑफिस। वुड यू लाइक टू लीड एजुकेशन इनिशिएटिव, रिमोट, पार्ट टाइम।

मैंने हाँ कहा। अब मैं सुबह दुकान, दोपहर क्लास, शाम को यूएस टीम के साथ काम। सैलरी डॉलर में नहीं, पर इज्जत में बहुत।

पिछले महीने पापा 68 के हुए। मैंने छोटा सा फंक्शन रखा। दोस्त आए, वही जो कहते थे तूने करियर बर्बाद किया। पापा ने माइक ले कर कहा, मेरा बेटा अमेरिका नहीं गया, पर मेरे पास रहा। जब मैं अस्पताल में था, उसने मेरा हाथ पकड़ा। जब इसकी माँ के बाल गए, इसने चोटी बनाई। करियर तो बहुत लोग बनाते हैं, बेटा कोई कोई बनता है।

माँ ने धीरे से कहा, मुझे आज भी वह ऑफर लेटर याद है। तूने अलमारी में क्यों रखा। मैंने कहा, ताकि याद रहे मैंने क्या छोड़ा। बोली, तूने छोड़ा नहीं, तूने चुना।

आज दुकान पर बैठा हूँ। सामने स्कूल के बच्चे टॉफी ले रहे हैं। लैपटॉप पर कोड चल रहा है। पापा बगल में अखबार पढ़ रहे हैं, माँ काउंटर पर बैठी हैं।

कभी कभी रात को वह ऑफर लेटर निकालता हूँ। 240,000 डॉलर। फिर माँ की हँसी सुनता हूँ, पापा की खाँसी कम हुई है, देखता हूँ। और लेटर वापस रख देता हूँ।

लोग पूछते हैं, पछतावा होता है। मैं सच कहता हूँ, पहले होता था। जब दोस्त बेंगलुरु से फोटो डालते, यूएस ट्रिप की। अब नहीं। क्योंकि मैंने करियर का त्याग नहीं किया, मैंने करियर को रीडिफाइन किया।

मेरा करियर अब सिर्फ कोड नहीं, केयर है।

मैंने माता पिता के लिए अमेरिका छोड़ा, पर उनके साथ जिंदगी जी ली। पापा को हर सुबह चाय दे पाता हूँ, माँ के पैर दबा पाता हूँ। ये 2.4 करोड़ में नहीं मिलता।

अगर फिर से मौका मिले, तो मैं फिर वही करूँगा। वीजा कैंसिल, जॉब छोड़, दुकान खोल। क्योंकि कुछ त्याग घाटा नहीं होते, वे निवेश होते हैं, प्यार में।

और आज जब कोई बच्चा पूछता है, भैया आप आईआईटी करके दुकान क्यों, मैं हँस कर कहता हूँ, क्योंकि मेरे माता पिता मेरी सबसे बड़ी कंपनी हैं, और मैं उनका फुल टाइम सीईओ हूँ।

'मेरी 10 साल की बेटी से संबंध बनाता था.', शादीशुदा गर्लफ्रेंड ने लिव-इन पार्टनर को मारी गोली, सुनाई दरिंदगी की दास्तांउत...
06/05/2026

'मेरी 10 साल की बेटी से संबंध बनाता था.', शादीशुदा गर्लफ्रेंड ने लिव-इन पार्टनर को मारी गोली, सुनाई दरिंदगी की दास्तां

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां अपने लिव-इन पार्टनर की निरंतर प्रताड़ना और अश्लील हरकतों से तंग आकर एक महिला ने उसकी हत्या कर दी. पुलिस ने इस मामले में नेहा नाम (बदला हुआ नाम) की महिला को गिरफ्तार किया है.

29 अप्रैल की सुबह करीब साढ़े आठ बजे, नगीना देहात थाने के अंतर्गत आने वाले जुलाहापुर गांव के जंगल में एक 26 वर्षीय युवक का शव मिलने से हड़कंप मच गया था. मृतक की पहचान गांव के ही रहने वाले अनुज के रूप में हुई. अनुज के सिर पर गोली लगने का गहरा निशान था. ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और मामले की गहन तफ्तीश शुरू की.

जांच के दौरान अनुज की मां ने पुलिस को बताया कि पिछले दो वर्षों से नेहा नाम की महिला अपनी बेटी के साथ अनुज के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थी. उन्होंने जानकारी दी कि 28 अप्रैल की शाम अनुज और नेहा बाइक पर सवार होकर कहीं गए थे. रात को नेहा तो घर लौट आई, लेकिन अनुज वापस नहीं आया. अगली सुबह उसकी लाश गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर जंगल में मिली. इसी बयान के आधार पर पुलिस ने शोभा को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की.

प्रताड़ना की खौफनाक कहानी

पुलिस पूछताछ में नेहा ने अपना जुर्म कुबूल करते हुए एक दर्दनाक दास्तां सुनाई. नेहा ने बताया कि साल 2011 में उसकी शादी सतेंद्र से हुई थी, जिससे उसकी एक बेटी है. आपसी मतभेदों के कारण वह 2024 में पति से अलग हो गई और नजीबाबाद में रहने लगी, जहां उसकी मुलाकात अनुज से हुई. जल्द ही दोनों लिव-इन में रहने लगे, लेकिन अनुज का व्यवहार धीरे-धीरे हिंसक और अनैतिक होता गया.

यूपी के इस सास-दामाद ने कर रखा पूरे परिवार की नाम में दम, 12 साल पहले भागे थे अब दोबारा किया कांड

नेहा का आरोप है कि अनुज उसकी 10 साल की बेटी के सामने ही जबरन संबंध बनाता था और बेटी के साथ भी अश्लील हरकतें करता था. हद तो तब हो गई जब अनुज ने नेहा की छोटी बहन के साथ भी दुष्कर्म का प्रयास किया, जिसके चलते वह जेल भी जा चुका था. इसके अलावा, अनुज ने नेहा की अश्लील वीडियो बना ली थी और उसे अपने दोस्तों के साथ संबंध बनाने के लिए मजबूर करता था.

हत्या की साजिश और गिरफ्तारी

इन हरकतों से तंग आकर नेहा ने अनुज को रास्ते से हटाने का फैसला किया. 28 अप्रैल की शाम दोनों बाजार गए, जहां उन्होंने शराब पी और खाना खाया. वापसी के समय जब अनुज नशे में था, तो नेहा ने चालाकी से उसकी कमर में लगा 315 बोर का तमंचा निकाल लिया. जंगल के पास टॉयलेट के बहाने बाइक रुकवाकर नेहा ने अनुज की कनपटी पर तमंचा सटाकर गोली मार दी. वारदात के बाद वह चुपचाप घर लौट आई.

बिजनौर के एसपी ग्रामीण प्रकाश कुमार ने बताया कि नेहा से हत्या में प्रयोग किया गया 315 बोर का तमंचा और खोखा बरामद कर लिया गया है. नेहा ने पुलिस को बताया कि वह अनुज को मारकर खुद भी आत्महत्या करना चाहती थी, मगर अपनी बेटी के भविष्य की चिंता के कारण उसने यह कदम नहीं उठाया.😔🙏

भरतपुर। बयाना कस्बे के आदर्श नगर में मंगलवार देर शाम एक सरकारी महिला शिक्षिका का शव रसोई में फंदे से लटका मिलने से सनसनी...
06/05/2026

भरतपुर। बयाना कस्बे के आदर्श नगर में मंगलवार देर शाम एक सरकारी महिला शिक्षिका का शव रसोई में फंदे से लटका मिलने से सनसनी फैल गई। मृतका की पहचान 37 वर्षीय रश्मि मीना के रूप में हुई है, जो बयाना ब्लॉक के दहगांव स्कूल में कार्यरत थीं।
जानकारी के अनुसार, रश्मि के पति कालूराम जयपुर में विकास अधिकारी पद पर कार्यरत हैं, जबकि रश्मि अपने पिता भूपसिंह मीना के घर रह रही थीं।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मृतका कुछ समय से मानसिक तनाव में थीं। बैग से कुछ धार्मिक सामग्री भी बरामद हुई है।
एसएचओ के अनुसार, शिक्षिका मंगलवार दोपहर जयपुर से लौटी थीं और कुछ समय बाद यह घटना सामने आई। पुलिस ने शव को उपजिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाकर मामले की जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम की कार्रवाई पति के आने के बाद की जाएगी।
शिक्षिका की शादी करीब 16 वर्ष पूर्व हुई थी और उसके दो बच्चे भी है।

दूल्हे की गाड़ी रुकवाकर प्रेमी ने दिखाए फोटो वीडियो फिर बोला यह मेरी है साथ ले भागा
26/04/2026

दूल्हे की गाड़ी रुकवाकर प्रेमी ने दिखाए फोटो वीडियो फिर बोला यह मेरी है साथ ले भागा

हमारे समाज मे साइको भरे पड़े हैं। वो कई रूपों में विद्यमान हैं। कोई डॉक्टर, कोई टीचर, कोई दुकानदार, कोई चाय वाला आदि आदि।...
23/04/2026

हमारे समाज मे साइको भरे पड़े हैं।
वो कई रूपों में विद्यमान हैं। कोई डॉक्टर, कोई टीचर, कोई दुकानदार, कोई चाय वाला आदि आदि।
आपको इन लोगों से बचना है।

हरियाणा के अंबाला में एक महिला ने डॉक्टर मान नाम के चिकित्सक पर इलाज के नाम पर अश्लील हरकतें करने और मारपीट का बेहद गंभीर आरोप लगाया है। यह घटना 'पंजोखरा' थाना क्षेत्र की है।

📍 सायटिका के दर्द का इलाज कराने गई थी महिला
• मजबूरी का फायदा: पीड़िता लंबे समय से सायटिका (कमर से पैर तक दर्द) से परेशान थी। कई जगह आराम न मिलने पर वह 15 अप्रैल को डॉ. मान के क्लिनिक पहुँची।
• अंधेरे कमरे की साजिश: आरोप है कि डॉक्टर ने उसे क्लिनिक के अंदर एक अलग कमरे में बुलाया और इलाज के लिए कपड़े उतारने का दबाव बनाया।

🤫 मालिश के बहाने प्राइवेट पार्ट को छुआ
महिला का आरोप है कि जब उसने कपड़े उतारने से मना किया, तो डॉक्टर ने कहा कि बिना मालिश के इलाज संभव नहीं है। आरोप के मुताबिक:
• मालिश करने के बहाने डॉक्टर ने महिला के प्राइवेट पार्ट को छुआ।
• जैसे ही महिला को डॉक्टर की गलत मंशा का अहसास हुआ, उसने शोर मचा दिया।
• शोर मचाने पर डॉक्टर ने उसकी पिटाई भी की, लेकिन वह किसी तरह वहां से बचकर बाहर निकली।

🚔 डॉक्टर फरार, पुलिस कर रही तलाश
घटना के बाद महिला ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर न्याय की गुहार लगाई है। पंजोखरा थाना प्रभारी जय सिंह के अनुसार:
• आरोपी डॉक्टर के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है।
• आरोपी फिलहाल फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।
• पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपी वास्तव में डॉक्टर है या कोई झोलाछाप।

💬 समाज और सुरक्षा पर कुछ कड़वे सवाल (कमेंट में राय दें):
1. भरोसे का कत्ल: डॉक्टर को भगवान का रूप माना जाता है, लेकिन ऐसी घटनाएं इस पेशे को बदनाम करती हैं। क्या क्लीनिकों में महिला स्टाफ का होना अनिवार्य नहीं होना चाहिए?
2. फर्जी डॉक्टर: पीड़िता ने आरोपी की डिग्री पर भी सवाल उठाए हैं। क्या आपके आसपास भी ऐसे संदिग्ध डॉक्टर प्रैक्टिस कर रहे हैं?
3. महिला की हिम्मत: पीड़िता ने न केवल शोर मचाया बल्कि वीडियो बनाकर समाज के सामने सच रखा। क्या हमें अपनी बेटियों को ऐसे खतरों के खिलाफ और अधिक मुखर बनाना चाहिए?

पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए इस पोस्ट को शेयर करें और अपने क्षेत्र के फर्जी डॉक्टरों से सावधान रहें।

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