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30+ Women Talks Life After 30 with Women's & Men's Wisdom and Stories
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उस दिन वो चोट मेरे पैर में नही बल्कि मेरे दिल में लगी थी , मै ये तक भूल गया था की वो पहले से शादी शुदा है और मुझसे उम्र ...
27/03/2026

उस दिन वो चोट मेरे पैर में नही बल्कि मेरे दिल में लगी थी , मै ये तक भूल गया था की वो पहले से शादी शुदा है और मुझसे उम्र में भी बड़ी है।

अब तो रोज मैं स्कूल से आकर मैदान में चला जाता था और घंटो उनके घर के बाहर बैठा देखता रहता की एक बार उन्हे देख लू।

कई दिनों की मशक्कत के बाद मालूम चला की उनका नाम शालिनी गुप्ता है और उनके हसबैंड का नाम विक्रम गुप्ता है जो की एयरलाइन एजेंसी में काम करते है और अक्सर घर से बाहर जाते रहते है और इसी वजह से उनका ट्रांसफर भी होता रहता है।

अक्सर शालिनी घर में अकेली ही रहती थी, उनके सास ससुर अब इस दुनिया में नही है और नाही उनकी कोई औलाद थी।

मै जब भी शाम को मैदान में आता तो उन्हें छत पे अकेले टहलते देखा करता, कान में हेडफोन लगाए और गानों की धुनों को गुनगुनाते हुए। मुझे लगता था की जैसे वो अपने अकेलेपन को उन गानों की मदद से भरने की कोशिश करती थीं।

कई बार तो उनकी नज़रे मुझ पर भी पड़ती है और वो मुझे हाथ हिलाकर इशारा करती और इशारो में पूछती की दर्द कैसा है?

मै भी इशारो में ही जवाब देता..की ठीक हूं।

उसके बाद उनके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कुराहट आ जाती थीं।

एक रोज वो मुझे सब्जी मार्केट में मिल गई, वो मछली ले रही थी और मैं जन्म से शाकाहारी हूं और मुझे मांस मछली की गंध बिलकुल बर्दाश्त नहीं होती हैं फिर भी मैं उन्हें देखकर उनके पास मछली की दुकान पर चला गया।

शालिनी : तुम्हारा पैर कैसा है अभी?

मैं : (हकलाते हुए) ठीक है आ...Mrs. गुप्ता।

मैं आंटी कहने जा रहा था लेकिन फिर मैने Mrs. गुप्ता कह दिया।

वो एक हल्की सी मुस्कुराहट के साथ बोली, "हम्म ...लेकिन तुमने उस दिन अपना नाम नही बताया ?"

"मेरा नाम संजू है" मैने बोला।

तभी उनके पति वहां आ जाते हैं और मुझे देख कर पूछते है," और भई! कैसा है पैर तुम्हारा? शालिनी बोल रही थी की तुम हमारे धर की दीवार से गिर गए थे।"

मै उन्हे देख कर थोड़ा सा डर जाता हूं और फिर दबे शब्दो में कहता हु...ठीक हूं अंकल।

उनके पति दिखने में काफ़ी हैंडसम थे, बॉडी वॉडी भी बनाई हुई थी। उन्हे देखकर मुझे काफी जलन होने लगी थी, इसीलिए मै वहां से निकल गया ।

उस दिन मैंने सोचा की शालिनी तो नॉन वेजिटेरियन है और मै शाकाहारी, इसलिए मैं बाजार से वापस आते हुए एक होटल में रुक गया और वहां से एक फिश फ्राई ले लिया और सोचा की एक बार अपने बेडरूम में जाकर इसे ट्राई करूंगा।

मैं नहीं चाहता था की शालिनी मेरी वजह से अपने खान पान में कोई समझौता करे।

बाजार की बाकी सामान को किचेन में रख मै अपने कमरे में पहुंच गया और फिश फ्राई वाली थैली निकाल ली।


लेकिन उसको देख कर मेरा मन बैठा जा रहा था, मैने अपनी नाक बंद कर और दिल मजबूत करके एक टुकड़ा काट कर जैसे ही उसे अपने मुंह में रखा।

उसी के साथ ही मुझे उबकाई आने लगी और मै बची हुई मछली ले कर बाथरूम में भागा, और उसके बाद तो उल्टी कर कर के मेरी हालत पतली हो गई।

उस दिन मैंने समझा की इसलिए लोग कहते है की ..........................प्यार की डगर मुश्किलों भरा होता है ।

बचपन और जवानी के बीच एक ऐसा समय होता है जिसे हम टीन एज कहते है और उस उम्र में हर लड़के के जीवन में एक ना एक ऐसा किस्सा ह...
27/03/2026

बचपन और जवानी के बीच एक ऐसा समय होता है जिसे हम टीन एज कहते है और उस उम्र में हर लड़के के जीवन में एक ना एक ऐसा किस्सा होता है जिसे वो सिर्फ अपने अंदर ही रखता है, किसी से उस किस्से को शेयर करने से घबराता है, ये किस्सा भी ऐसा ही एक किस्सा है। ❤️

मैं नरेला शहर में रहता था, बचपन से ही मेरी गिनती मोहल्ले के मेघावी छात्रों में होती थी। उस समय मेरी उम्र करीब १८-१९ होगी, मैने जस्ट जवानी की दहलीज पर कदम ही रखा था। 😎

मैं पढ़ने लिखने में जितना अच्छा था खेलकूद में भी उतना ही अव्वल था। हर बार मोहल्ले के क्रिकेट टूर्नामेंट में हमारी टीम ही जीतती थी और मैं था मेरी टीम का कैप्टन। 😍

सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था, लेकिन एक दिन जब मैं अपने क्रिकेट ग्राउंड में खेल रहा था। हमारी गेंद मैदान के पास रहने वाले मकान में चली जाती हैं। 🙂

वो मकान पहले खाली था, अभी हाल फिलहाल ही कोई फैमिली आई हैं वहा रहने के लिए।

चूंकि गेंद मेरी वजह से उनके घर में गई थी इसीलिए मुझे ही गेंद लेने जाना पड़ा।

मैने सोचा, पता नही कैसी फैमिली होंगी? अगर मेरी टीम के सामने ही मुझे डांट लग गई तो फिर मेरा तो कचरा हो जायेगा।

इसिलिये मैने मकान के बरामदे की दीवार लांघ कर चुपचाप गेंद लाने की सोची और मै चुपचाप बिना आवाज किए दीवाल पर चढ़ गया।

अचानक मेरी नजर मकान की खिड़की पर गई, मैने देखा एक ३०-३२ साल की औरत सिर्फ टॉवेल में बाथरूम से निकल रही थी।

वो नजारा देख मैने अपनी जीवन में पहली बार अपने अन्दर यौवन को महसूस किया था।

मै गेंद के बारे में भूल ही गया अब मैं सिर्फ छुप छुप कर उस औरत को देखने लगा लेकिन तभी मेरे एक दोस्त ने मुझे आवाज लगाई और आवाज सुनकर उस औरत की नज़र मुझ पर पड़ी, जैसे ही मेरी नजर उनसे मिली मेरा बैलेंस बिगड़ गया और एक जोरदार चींख से मैं सीधा नीचे आ गिरा।

मेरे दोस्त और वो औरत मेरी चींख सुनकर मुझे देखने के लिए बरामदे में आए, वहां मै औंधे मुंह लेटा पड़ा हुआ था।

मेरे दोस्तों ने मुझे उठाया ही था की वो आंटी सामने प्रकट हो गई।

आंटी : सुनो! तुमलोग इसे घर में लेके आ जाओ, मै इसकी फर्स्ट एड ट्रीटमेंट कर देती हूं।

उसके बाद मेरे दोस्त मुझे उठा कर आंटी के घर के भीतर लेके चले जाते है, और मुझे एक सोफे पे लेटा देते हैं।

तभी आंटी एक फर्स्ट एड का बॉक्स लेकर मेरे पास बैठ जाती हैं, मै दर्द में होने के वावजूद उन्हे नजरे बचा बचा कर घूरे जा रहा था।

उनका गोल मटोल चेहरा, बड़ी बड़ी आंखे, लंबे गीले बाल, साड़ी के बीच से झांकती उनकी कमर, चेहरे पर हमेशा एक मुस्कान।

मै उन्हे निहारते निहारते एक सपनो की दुनिया में खो गया था। अक्सर जैसे फिल्मों में होता है, जब हीरो, हीरोइन को देखता है तो वो अपने सपनो में कभी पहाड़ों पे तो कभी समुद्रों के ऊपर लहराती नावो पर गाने गाने लगता है।

उन्हे निहारने के चक्कर में दर्द का अहसास ही नहीं हुआ, तभी मेरे दोस्त ने मेरे सर पे एक ट्पली बजाई और मेरे कान में बोला,"अबे साले! घूरना बंद कर, आंटी असहज महसूस कर रही हैं।"

उसी के साथ मै अपने ख्यालों को दुनिया से निकल कर वापस हकीकत की दुनिया में आ गया, मैने देखा की सचमुच आंटी थोडी सी असहज हो गई थी।

मै उस समय शर्म से लाल हो गया था, लेकिन मेरा दिल जोरो से धड़क रहा था और मेरा दिल मुझसे कह रहा था की...बेटा ..........................यही है तेरा पहला प्यार।

चले जाते हो यूं बनके बेखबर 😌 Miss you 💕
27/03/2026

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06/01/2026
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