13/04/2025
**कहानी: छुपा हुआ रिश्ता**
गाँव की पुरानी हवेली में जमींदार रामनाथ का परिवार रहता था। छोटे बेटे की नई बहू, राधिका, शहर से आई थी—खूबसूरत, पढ़ी-लिखी और शांत स्वभाव की। जेष्ठ, वीरेंद्र, उम्र में बड़ा लेकिन अब तक कुंवारा, अक्सर राधिका की मदद के बहाने उसके पास आता।
धीरे-धीरे दोनों के बीच एक अनकहा आकर्षण पनपने लगा। राधिका को वीरेंद्र की गहरी आँखों में कुछ अलग ही अपनापन महसूस होता। एक दिन बारिश में भीगती राधिका को वीरेंद्र ने देखा, और उन दोनों की निगाहें मिलते ही सब कुछ जैसे ठहर गया। उस पल कुछ ऐसा जुड़ा जो ना समझा गया, ना ही कहा।
लेकिन एक रात वीरेंद्र को राधिका के कमरे से निकलते उसके छोटे देवर ने देख लिया। घर में हलचल मच गई। रामनाथ ने दोनों को बुलाया, लेकिन तब राधिका ने सबके सामने सच बोल दिया—"मैं वीरेंद्र से पहले ही शहर में प्रेम कर बैठी थी, पर हमारी शादी नहीं हो सकी। अब तक छुपा था, पर अब नहीं।"
रामनाथ ने कुछ देर चुप रहकर कहा, "अगर यही सच है, तो तुम दोनों की शादी होगी।"
पूरा घर स्तब्ध था, पर राधिका और वीरेंद्र की आँखों में अब सुकून था।
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