25/05/2026
हमारे गाँव बैरिया में कंपोज़िट विद्यालय का भव्य उद्घाटन हुआ।
सैकड़ों नेता आए, जनप्रतिनिधि आए, बड़े-बड़े भाषण हुए, शिक्षा की गुणवत्ता पर बातें हुईं, सरकारी विद्यालयों की उपलब्धियाँ गिनाई गईं…
लेकिन एक सवाल दिल में रह गया —
❓क्या किसी एक नेता, अधिकारी, शिक्षक या जनप्रतिनिधि ने यह कहा कि
“मैं अपने बेटे-बेटी या रिश्तेदार का एडमिशन इसी विद्यालय में कराऊँगा?”
अगर सरकारी विद्यालयों में सचमुच अच्छी शिक्षा, बेहतर व्यवस्था और उज्ज्वल भविष्य है,
तो फिर अपने बच्चों के लिए प्राइवेट स्कूल क्यों चुने जाते हैं?
सरकारी विद्यालय क्या केवल गरीबों के बच्चों के लिए रह गए हैं?
क्या समान शिक्षा व्यवस्था सिर्फ भाषणों तक सीमित है?
जिस दिन अफसर, नेता और शिक्षक अपने बच्चों को सरकारी विद्यालयों में पढ़ाने लगेंगे,
उसी दिन सरकारी शिक्षा व्यवस्था वास्तव में मजबूत हो जाएगी।
सोचिए…
विद्यालय की असली गुणवत्ता भाषणों से नहीं,
बल्कि विश्वास से साबित होती है। ✍️