Pushymitra माने, एक उच्च श्रेणी का ज्ञानकोष | जो विभिन्न विषयो पर सटीक और उच्च कक्षा की जानकारी के लिए जाना जाता है | Pushymitra की शुरुआत २०२१ में हुई थी | जो मूल से भारतीय और कर्म से ब्रामण (ज्ञान बाटने वाली वस्तु या व्यक्ति) है | Pushymitra पर दी गई अधिकतम जानकारी हिन्दू धर्म के महान ग्रंथो से ली गई है | Pushymitra पर कुछ इस प्रकार के विषय है | आयुर्वेद, प्राणायाम, योगासन, आध्यात्मिकता, प्राचीन
विज्ञान आदि… | जो एक व्यक्ति के ज्ञान, स्वास्थ और जानकारी के लिए उत्तम और आवश्यक है |
Pushymitra की स्थापना …
Pushymitra की स्थापना का महत्वपूर्ण कारण ये है की, हिन्दू धर्म के महान ग्रंथो और विज्ञान के बारे में अधिकतर व्यक्तिओ को आधी अधूरी या गलत जानकारी है |
आपने वो कहावत तो सुनी ही होगी की “अज्ञान से अधिक खतरनाख आधा अधूरा ज्ञान होता है |” जरा सोचिये, अगर किसी शिक्षक, किसी ड्राइवर या किसी डॉक्टर को ज्ञान अधूरा हो तो क्या होगा | सोचिये यदि डॉक्टर आपको गलत दवाई देदे जिससे आपकी मोत हो जाये आदि | इससे साफ होता है की आधा अधूरा ज्ञान हमारे धर्म के लिए भी घातक ही है |
इसी लिए हम एक ऐसा माध्यम बनाना चाहते थे | जो शास्त्रों के अनुसार सही जानकारी को आसान भाषा में आप तक पहोंचा सके | और उसी समय हमे Pushymitra का विचार आया …
Pushymitra का उपयोग क्यों करें |
Pushymitra का उद्देश्य हिन्दू धर्म के महान ग्रंथो और विज्ञान के बारे में आधी अधूरी और गलत जानकारी को दूर कर सही जानकारी को पोहोचाना है |
रिसर्चे कहती है की अधिकतर लोग अपने मष्तिष्क का 1 प्रतिशत से भी कम हिस्से का उपयोग कर पाते है | और हम कहते है की हिन्दू धर्म के महान ग्रंथो और विज्ञान के बारे में लोग 0.001 प्रतिशत से भी कम जानते है | विश्वास नहीं होता तो आगे पढ़िए |
महर्षि भारद्वाज :-
महर्षि भारद्वाज ने यंत्र सर्वस्व और विमान शास्त्र नामक दो प्रचलित ग्रंथो की रचना की | जिनमे यंत्र सर्वस्व में सभी प्रकार के यंत्रो को बनाने की और चलाने की विधि बताई गई है | और विमान शास्त्र में सामान्य विमानों और युद्ध के विमानों को बनाने की और चलाने की विधि बताई गई है |
विमान शास्त्र एक प्रख्यात ग्रंथ है | जो यंत्र सर्वस्व के आठ भागो में से एक है | जिनका उपयोग आज भी बड़ी बड़ी वैमानिक और अंतरिक्ष संस्थाएँ करती है |
विमान शास्त्र में आठ अध्याय और 100 खंड है | जिनमे विमान बनाने की तकनीक का विस्तार से वर्णन किया गया है | विमान शास्त्र में 500 प्रकार के विमान बनाने की विधि बताई गई है | जो 32 तरीको से बनाई जा सकते है | विमान शास्त्र के अभ्यास के बाद 8 मुख्य प्रकार के विमानों का पता चलता है | जो कुछ इस प्रकार है |
शक्त्युद्गम – बिजली से चलने वाला विमान,
भूतवाह – अग्नि, जल और वायु से चलने वाला विमान,
धुमयान – गैस से चलने वाला विमान,
शिकोद्गम – तेल या पारे से चलने वाला विमान,
अंश वाह – सूर्य की किरणों से चलने वाला विमान,
तारा मुख – चुंबक से चलने वाला विमान,
मणि वाह – चंद्रकांत, सूर्यकान्त मणियो से चलने वाला विमान,
मरुतमखा – केवल वायु से चलने वाला विमान
इस ग्रन्थ में विमान चालकों का प्रशिक्षण, उडान मार्ग, विमानों के भाग, उपकरण, चालक और उनके परिधान और विमान चालक के भोजन के बारे में विस्तार से बताया गया है | और भी बोहोत कुछ….
ब्रम्हास्त्र :-
ब्रम्हास्त्र एक अमोघ दिव्य अस्त्र है | जिसके एक बार आवाहन करने के बाद प्रक्ष्येपित करना अनिवार्य है | नहीं तो यह चलाने वाले को ही नष्ट कर देता है | इससे होने वाला विस्फोट 10,000 योजन (77000 Sq.km) के विस्तार को मिटा देता है | इसका प्रयोग जिस विस्तार में किया जाता है | वहा जिव एवं संसाधन सम्पूर्णतह समाप्त हो जाते है | और वहां 12 वर्षो तक बारिश नहीं होती है |
वैज्ञानिक को मानना है की थार रेगिस्तान के बनने का कारण एक बोहोत बड़ा परमाणु विस्फोट है | और कुछ समय पहले एक घर बनाते समय यहाँ पर जमीन के निचे एक बोहोत बड़ी रेडियोएक्टिव परत मिली है जो परमाणु विस्फोट के सिवाय नहीं हो सकती |
रामायण के दरमियान श्री रामजी ने समुद्र देव के, मार्ग न देने पर, ब्रम्हास्त्र का आवाहन किया था | मगर फिर समुद्र देव ने मार्ग दे दिया | इस लिए इसका प्रयोग उत्तर-पश्चिम भारत में किया गया | जहाँ आज थार रेगिस्तान है |
हिन्दू धर्म के शास्त्रों में ब्रम्हास्त्र के प्रयोग के वर्णन के हिसाब से पश्चिम भारत के समुद्र के उस पार, उत्तर-पश्चिम भारत में और मध्य एशिया में भी किया गया था | और ब्रम्हास्त्र के प्रयोग से होने वाला विस्फोट जितने विस्तार को नष्ट करता है | उतना ही विस्तार इन तीनो रण का है | जिनके नाम कुछ इस प्रकार है | पुंटलैंड का रेगिस्तान उस्तयुर्त का रेगिस्तान और थार का रेगिस्तान |
Pushymitra पर दी गई जानकारी का स्त्रोत |
क्योंकि Pushymitra का उद्देश शास्त्रों के अनुसार सही जानकारी को आसान भाषा में आप तक पहोंचाना है | तो Pushymitra पर दी गई अधिकतर जानकारी का स्त्रोत, हिन्दू धर्म के महान ग्रंथ और भारतीय विज्ञान से है |
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