17/03/2025
स्त्री की योनि और स्तन उनके शरीर का ऐसा भाग है जिसके लिए पुरुष कुछ भी करने को तैयार होते हैं यहां तक कि जो काम उन्होंने जिंदगी में कभी नहीं किया वो काम इसकी चाहत में कर गुजरते हैं
समझ में नहीं आता की ये प्रेम अपनी पत्नी के लिए है या उनके शरीर के लिए, ये लगाव उनसे है या उनके निजी अंगो से
अगर कोई स्त्री किसी पुरुष को अपने निजी अंगों तक पहुंचने दे रही है, तो निश्चित रूप से वह पुरुष उसके जीवन में एक खास जगह रखता है। जब घर में विवाह की चर्चा होने लगी, तो मेरे मन में भी वही विचार आए, जो अक्सर हर पुरुष के मन में आते हैं—अब तो वह सब मिलेगा, जिसकी चाहत हर पुरुष को होती है।
घरवालों ने लड़की ढूंढनी शुरू कर दी, और कुछ ही महीनों में मेरी शादी प्रीति से तय हो गई। शादी से पहले आकर्षण अक्सर शारीरिक होता है—खूबसूरत और सुडौल शरीर देखने की चाह हर पुरुष में होती है। शायद यह सुनकर आपको लगे कि मैं कैसा इंसान हूं, लेकिन सच मानिए, 90% पुरुष शादी से पहले यही सोचते हैं। मेरे मन में भी कई सवाल थे, लेकिन एक सवाल सबसे भारी था—"प्रीति का शरीर कैसा होगा?"
शादी हुई, सब अच्छा चल रहा था, धीरे-धीरे मुझे प्रीति से प्रेम हो गया। लेकिन एक सवाल मन में हमेशा बना रहता था—"मुझे प्रेम प्रीति से है, या उसके शरीर से?" क्योंकि अगर किसी रात वह न कह देती, तो मेरा मन खिन्न हो जाता, और कई दिनों तक हम ठीक से बात नहीं करते। लेकिन जब हमारे बीच समागम होता, तो पलभर में सब ठीक लगने लगता।
समय बीतता गया, और प्रीति गर्भवती हुई। अब मन में एक अलग ही बेचैनी थी—"कैसे इस नए मेहमान की जिम्मेदारी निभाऊंगा?" इसी बीच डॉक्टर ने बताया कि प्रीति की नॉर्मल डिलीवरी नहीं हो सकती, ऑपरेशन करना होगा। ऑपरेशन को लेकर मन में डर था, इसलिए कुछ लोगों की सलाह पर हमने दूसरे डॉक्टर से भी राय ली। उन्होंने बताया कि कुछ कठिनाई होगी, लेकिन नॉर्मल डिलीवरी संभव है और बेहतर भी रहेगा।
9 मार्च को मैंने प्रीति को अस्पताल में भर्ती कराया। बच्चा दुनिया में आने ही वाला था, लेकिन तभी दर्द के कारण प्रीति की पल्स गिरने लगी और वह बेहोश होने लगी। डॉक्टरों को चिंता हुई कि अगर स्थिति बिगड़ी, तो बच्चा बाहर नहीं आ पाएगा। तुरंत डॉक्टर ने मुझे अंदर बुलाया और कहा कि अपनी पत्नी को संभालो, उसे मोटिवेट करो।
मैंने जब प्रीति को देखा, तो वह नग्न अवस्था में पीड़ा से कराह रही थी। उसकी योनि खुली हुई थी, जिससे बच्चे का सिर बाहर झांक रहा था। यह वही जगह थी, जिसकी चाहत मुझे हर रात होती थी। कुछ ही क्षणों में बच्चा बाहर आया, और तुरंत उसके सीने से कपड़ा हटाकर उसे मां के स्तनों से लगाकर ढक दिया गया।
मैंने देखा—वही शरीर, जिसे पुरुष पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहता है, वही शरीर जन्म देने का माध्यम भी बनता है। वही अंग, जिनकी चाह पुरुष को होती है, वही जीवन का स्रोत बनते हैं। उस दिन मेरी सोच बदल गई। मैं समझ गया कि मेरा प्रेम सिर्फ प्रीति के शरीर से नहीं, बल्कि उससे है।
उस रात के बाद, मेरी आंखों में न केवल अपनी पत्नी के लिए, बल्कि अपनी मां के लिए भी सम्मान कई गुना बढ़ गया। मुझे एहसास हुआ कि इस दुनिया में मुझे लाने के लिए मेरी मां ने कितने कष्ट सहे होंगे।
मेरा मानना है कि जो पुरुष अपनी पत्नी को सिर्फ एक भोग की वस्तु समझते हैं, उन्हें एक बार प्रसव के दौरान अपनी पत्नी को जरूर देखना चाहिए। तब उन्हें एहसास होगा कि स्त्री सिर्फ प्रेम या वासना का साधन नहीं, बल्कि त्याग, पीड़ा और ममता का प्रतीक भी है।