Anand Kumar

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28/01/2025

प्रेम मे पड़ी नचनियां

शहर के लगभग सारे OYO को जानती है 😂😂

28/01/2025

आजकल लड़कियां अपना शरीर दिखाना फैशन समझ रही है यह आने वाली पीढ़ी के लिए बहुत नुकसान दायक हो सकता है👇😢

23/10/2024
02/06/2024

एक ऐयर हाॅस्टेज के लाये 960 ग्राम सोने की न्यूज ने 100 टन लाये सोने की न्यूज को दबा दिया!
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इस बार दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना खुद मैदान में उतरे है और उन्होंने आतंकवादी संगठन सिख फॉर जस्टिस द्वारा केजरीवाल...
01/06/2024

इस बार दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना खुद मैदान में उतरे है और उन्होंने आतंकवादी संगठन सिख फॉर जस्टिस द्वारा केजरीवाल को पैसे देने की बात कही है।

सिख फॉर जस्टिस का उद्देश्य पंजाब को भारत से अलग करना है। इसके सदस्य अधिकांशतः अमेरिका और इंग्लैंड में है, इन्हें पैसे की कमी नहीं है बस बिकाऊ नेता चाहिए और ये कमी अरविंद केजरीवाल ने पूरी कर दी।

वीके सक्सेना बीजेपी या कांग्रेस के प्रवक्ता नही है वे संवैधानिक पद पर है सरकार से उनका कुछ मांगना मायने रखता है। बिना किसी सबूत के कोई टेरर फंडिंग का आरोप यू ही नही लगा सकता, उन्होंने यह तक मांग की है कि आम आदमी पार्टी की पूरी फंडिंग ट्रेस करने की जरूरत है।

बहुत लोगो को लग रहा है की अरविंद केजरीवाल शराब घोटाले की वजह से जेल में है लेकिन ये गलत है, शराब घोटाले करके उसने जो काला धन कमाया वो धन आम आदमी पार्टी के फंड में गया और चूंकि केजरीवाल उस पार्टी का मालिक बना बैठा है इसलिए काले धन की चोरी में अंदर है।

ये कुछ वैसा है की मंदिर में चोरी हो रही थी और बाद में उस मंदिर की चौकीदारी करने वाले के घर ही सारा सामान मिल गया और अब वो चोर पंडित को जातिवाद का दोष दे रहा है। अरविंद केजरीवाल और वीके सक्सेना का रिश्ता क्रमशः इसी चोर और पंडित जैसा है।

लेकिन यदि वीके सक्सेना के पास पर्याप्त सबूत है जो की है भी तो फिर अब समय आ गया है की आतंकवाद की परिभाषा बदली जाए। अरविंद केजरीवाल जैसे लोग आज जेल में होंगे लेकिन कल महंगे वकीलों की दम पर बच जाएंगे, ये भ्रष्टाचार नही बल्कि सीधे आतंकवाद का मसला है।

ये तो सीधी से बात है की यदि केजरीवाल ने आतंकवादियों से पैसा लिया है तो बदले में उन्हें कुछ करने की छूट भी दी होगी। पन्नू के पोस्टर आज भी पंजाब में खुल्ला छपते है जबकि अकाली दल और कांग्रेस के समय किसी की मजाल नही थी।

कल्पना कीजिए कल को आप द्वारका से अक्षरधाम मेट्रो से सफर कर रहे है और राजीव चौक पर उसी मेट्रो में कुछ हो जाए तो असल दोष किसका होगा? सुरक्षा एजेंसियों का या फ्रीबीज के चक्कर में केजरीवाल को चुनने वाली जनता का।

अरविंद केजरीवाल इतना नीच है की उस समय वो यहां वहां दोषारोपण ही कर रहा होगा और ये सब जानते है। दूध की धुली पार्टी कोई नही है, बीजेपी ने 10 वर्षो में इतना विदेशी निवेश भारत में लाया है साफ है इन्होंने हर विदेशी कंपनी से कमीशन लिया होगा। कांग्रेस के पास तो 60 वर्षो तक सारा तंत्र था उसके पास रेगुलर फंडिंग आती है।

लेकिन अरविंद केजरीवाल जो आतंकवादियों के साथ मिलकर कर रहा है वो सीधे सीधे देश से गद्दारी है। वीके सक्सेना यदि सही है तो ये भ्रष्टाचार का मुद्दा है ही नही ये आतंकवाद की बात है और केजरीवाल बिल्कुल नही बचना चाहिए।

सिर्फ अल्लाह हु अकबर बोलकर खुद को उड़ा लेना आतंकवाद की परिभाषा नही हो सकती, इस परिभाषा का विस्तार बहुत बड़ा है। आप एक धर्म को आतंकवाद की जड़ कह सकते हो लेकिन अन्य धर्मों में भी ऐसे कितने ही केजरीवाल है जो सत्ता के लिए मानवता को दांव पर लगा सकते है।

01/06/2024

कांग्रेस के भ्रष्टाचारी बीजेपी में शामिल हो रहे है, पिछले कुछ दिनों से यह दलील आसमान पर है।

2008 का समय याद कीजिए, शायद ही कोई महीना हो जब आतंकवादी हमले नही हुए। 2 दर्जन से ज्यादा आतंकी हमले अकेले 2008 में हुए थे, इसके बावजूद 2009 में कांग्रेस फिर सत्ता में आ गई।

इसके विपरित 2004 में मात्र प्याज महंगी होने से वाजपेई सरकार गिर गई थी। जो सिद्ध करता है की कांग्रेस के वोटर बिल्कुल पक्के है, वे कांग्रेस पार्टी से ज्यादा अपने अपने नेताओ के लिए वोट करते है। इसलिए कांग्रेस कितना भी जहर उगल ले उसके वोट प्रतिशत पर ज्यादा असर नही दिखता।

बीजेपी का केस बिल्कुल उलट है यहां 303 सांसद है लेकिन गारंटी है की 250 सीटो पर लोग अपने सांसद से खुश नही होंगे। वे सिर्फ बीजेपी की विचारधारा देखकर वोट दे रहे है। यदि कांग्रेस आज सिर्फ राहुल गांधी का चेहरा दिखा कर लड़ ले तो उसका सफाया निश्चित है।

अब ऐसे में बीजेपी का अंकगणित सिर्फ दो ही लोग मजबूत बनाते है, एक नए वोटर और दूसरे परिवर्तित वोटर। 2014 में रिकॉर्ड तोड 68% वोटिंग हुई थी जो पहले 58% के आसपास थी, क्योंकि नया वोटर सरकार बदलने के लिए भीड़ गया था और इसीलिए मोदीजी 1990 के युवाओं के कंधो पर बैठकर दिल्ली पहुंचे थे।

यह वर्ग बीजेपी का कोर वोटर बन चुका है अब बारी 2000 के युवाओं की है। लेकिन हर पीढ़ी बीजेपी की तरफ हो ऐसा जरूरी नही है इसलिए इस बार परिवर्तित वोटो पर हाथ मारा गया है। उदाहरण के लिए अशोक चव्हाण बीजेपी में आए, अब यह निश्चित है की सिर्फ उनका चेहरा देखकर वोट करने वाले 20 से 30 हजार वोटर भी बीजेपी की ओर आ चुके है।

इतना कनवर्जन बहुत मायने रखता है, अशोक चव्हाण के स्तर का एक नेता तीन जिलों में अपनी दमखम रखता है। यही कारण है की ना चाहते हुए भी बीजेपी को इन नेताओ को अपनी ओर करना ही होगा। ये जोड़ तोड़ की राजनीति वाजपेई जी के सिद्धांतो के विरुद्ध थी यही कारण था की एक वोट से भी उनकी सरकार गिरा दी गई थी।

आज मोदीजी जो निर्णय ले रहे है वे वाजपेई जी सपने में नही सोच सकते थे क्योंकि उन्होंने राम की तरह मर्यादाएं नही त्यागी। लेकिन जब आपके विपक्ष में राहुल, ममता, लालू भालू जैसे लोग हो तो ये मर्यादाएं एक काव्य बनकर रह जाती है।

01/06/2024

712 ईस्वी में भारत पर पहला इस्लामिक आक्रमण हुआ मगर मुसलमानो को इसके बाद भी 400 वर्ष और कठोर परिश्रम करना पड़ा तब जाकर उन्हें भारत की सत्ता मिली।

1192 से 1757 मुस्लिम शासकों ने जुल्म की चरम सीमा पार कर दी, शायद ही किसी तरह का अत्याचार हो जो हिंदुओ पर ना हुआ हो। 1757 में जैसे तैसे उन्हें उखाड़ कर फेका लेकिन 50 वर्ष भी आजादी के नसीब नही हुए और अंग्रेज सिर पर आकर बैठ गए।

तब से 1947 तक अंग्रेजो का राज्य और 1947 से 2014 तक उन्ही अंग्रेजो की बनाई नीति के अनुरूप शासन हुआ। यदि इन 842 वर्षो का हिसाब लगाया जाए तो हिंदू को बस 18 वर्ष शुद्ध शासन के मिले है।

जिसमे से वाजपेई के 8 वर्षो का उतना मोल नही क्योंकि गठबंधन की सरकार थी मगर इन 10 वर्षो में हमने भारत को इतना आगे पहुंचाया है। योग्यता का परिणाम पत्र यहां दिखाई देता है, लेकिन हिंदू को शायद उस मेधावी बच्चे की तरह देखा गया जो चश्मा लगाए पहली बेंच पर बैठता है लेकिन उसे हेय समझा जाता है।

इंग्लैंड के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने हिंदुओ के लिए नीच शब्द का प्रयोग किया था और जब आजादी मिली तो कांग्रेस ने भी इसी विचारधारा से खुद को आगे बढ़ाया।

कहने को 100 में से 80 है लेकिन इसके बावजूद माइक पर मनमोहन सिंह खुलकर कहते थे की इस देश के संसाधनों पर हिंदुओ का अधिकार नहीं है। सोनिया गांधी हमे मारने वाले आतंकवादियों के लिए आंसू बहाती थी, दिग्विजय सिंह हमे खुलकर आतंकवादी कहता था।

यह तय मानिए की 1996 से 2024 के बीच यदि ये 18 वर्ष वाजपेई और मोदी के ना होते तो अब तक मुगलों से भी खूंखार सल्तनत कांग्रेस खड़ी कर चुकी होती। आज जहां हम फ्री सिलेंडर और बिजली की सोच रहे है उस समय हम सिर्फ ये सोच रहे होते की हिंदुओ को शरण देने के लिए दुनिया में और कौन सा देश बचा है?

इसलिए जाति धर्म का भेद मिटाकर सिर्फ हिंदुत्व के लिए वोट कीजिए। हमारा राष्ट्र सिर्फ लद्दाख से अंडमान और गुजरात से नागालैंड नही है अपितु हिमालय और हिंदुकुश से गारो पर्वत होते हुए समुद्र पर्यंत समग्र भूखंड भारत का अभिन्न अंग है।

जो राष्ट्र आज अलग है वे नदी की तरह भारत रूपी समुद्र में जरूर मिलेंगे। इसलिए वोट उन्ही को दीजिए जो राम को लाए है, कश्मीर और राम मंदिर के बाद भी यदि इस बार बीजेपी हार गई तो तय मानिए भविष्य में कभी कोई पार्टी हिंदुत्व के मुद्दे पर लड़ नही पाएगी।

हमे नेहरू के सपनो का भारत नही चाहिए जो 370 और मुस्लिम तुष्टिकरण में उलझा हो हमे श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनो का भारत चाहिए जो अखंड हो और जग सिर मोर हो। बस यही हमारे चुनाव का एजेंडा है और इसी को ध्यान में रखकर वोट कीजिए।

01/06/2024

लोकतंत्र बचाने के लिए परिवर्तन भी आवश्यक है इसलिए कांग्रेस को विजयी बनाकर राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाना चाहिए, बस कुछ बाते अपने अवचेतन मन में डाल लीजिए।

पब्लिक प्लेस पर थोड़ा संभलकर चलिए क्योंकि बम कभी भी फट सकते है अकेले 2008 में एक दर्जन से ज्यादा आतंकवादी हमले हुए थे।

अपने बच्चो को सेना में मत भेजिए 2014 में एक सैनिक हेमराज का सिर पाकिस्तानी सैनिक काटकर ले गए थे और भारत ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान की कड़ी निन्दा कर दी थी। सर्जिकल स्ट्राइक का कॉन्सेप्ट तो ये मोदीजी ले आए।

प्रतिवर्ष जैसे जैसे कांग्रेस कमजोर हो रही है पाकिस्तान भी कमजोर पड़ रहा है, जब कांग्रेस मजबूत थी तब पाकिस्तान और ज्यादा मजबूत था?

यदि कश्मीर घूमने जाए तो तिरंगा हाथ में ना ले, कांग्रेस ने इसी अपराध में श्यामा प्रसाद मुखर्जी को जहर देकर मरवा दिया था।

अयोध्या और मथुरा जाने वाले नरेंद्र मोदी भारत के प्रथम और अंतिम प्रधानमंत्री रह जाएंगे क्या पता इसके बाद अयोध्या का कॉन्सेप्ट ही खत्म कर दिया जाए? याद है ना तमिलनाडु से सनातन को समाप्त करने की शपथ ली गई थी और वो शपथ लेने वाले आज कांग्रेस के सहयोगी है।

अमेरिका इराक पर एक मिसाइल भी मार देता था तो हमारा स्टॉक मार्केट हिल जाता था, पेट्रोल के दाम तुरंत बढ़ जाते थे। आज दो बड़े युद्ध चल रहे है फिर भी.... खैर हमे क्या एक बार फिर फ्लैश बैक जी लेंगे कोई बात नही।

जो मजदूर वर्ग है वो अपना अलग देख ले, क्योंकि कांग्रेस तो मेक इन इंडिया की विरोधी रही है। इसलिए फैक्ट्री और प्रोडक्शन यूनिट की क्या जरूरत रहेगी? चीन से खरीद लिया करेंगे।

बाकी आप चिंता मत कीजिए भारत की बोटी बोटी करके कांग्रेस बेचती रहेगी मगर उसे 70 साल और लगेंगे तब तक आपकी हमारी दाल रोटी तो हो जायेगी बाकी अगली पीढ़ी का क्या है, पिछली वालो ने अंग्रेजो की गुलामी की थी अगली पीढ़ी चीन पाकिस्तान की कर लेगी।

इसलिए वोट फॉर दी चेंज, वोट फॉर कांग्रेस। नही तो चीन पाकिस्तान के हसीन सपने ये बीजेपी स्वाहा कर देगी।

बात निकलेगी तो फिर  #नेहरु तलक जायेगी!अब चूँकि प्रधानमंत्री मोदी के  #कन्याकुमारी में “ #विवेकानन्द_रॉक” पर ध्यान करने प...
01/06/2024

बात निकलेगी तो फिर #नेहरु तलक जायेगी!

अब चूँकि प्रधानमंत्री मोदी के #कन्याकुमारी में “ #विवेकानन्द_रॉक” पर ध्यान करने पर विवाद शुरू हो ही गया है तो जाहिर है कि इसका इतिहास भी निकल ही आएगा।

जैसा कि होना तय है, इस विवाद की जड़ें भी फिर #जवाहरेलाल तक ही पहुँच जाती हैं।

हुआ यूँ कि 1962 में #विवेकानन्द जन्मशताब्दी के अवसर पर कन्याकुमारी में लोगों ने एक समिति बनाई और तय किया कि एक पैदल ब्रिज उस चट्टान तक बनवाया जाए जिसे स्वामी विवेकानन्द के कन्याकुमारी निश्चय के लिए जाना जाता है।

स्वामी विवेकानन्द 24 दिसम्बर 1892 को कन्याकुमारी पहुंचे थे और दर्जनों पुस्तकें उनके तैरकर इस चट्टान पर जाने और ध्यान लगाने की गवाही देती हैं। इस चट्टान पर एक छोटा सा स्मारक बनाने की योजना भी थी। करीब-करीब इसी समय मद्रास के #रामकृष्ण_मिशन_आश्रम ने भी ऐसे ही स्मारक की योजना बनाई।

अब आपको तो पता ही है कि 1962 नेहरु का दौर था। स्थानीय आबादी में एक बड़ी संख्या #कैथोलिक #ईसाई मछुआरों की थी। चट्टान तक उस दौर में केवल तैरकर या नाव से पहुंचा जा सकता था। इन कैथोलिक #इसाई समूहों ने चट्टान को #सैंट_ज़ेवियर रॉक बुलाना शुरू कर दिया और एक बड़ा सा क्रॉस बनाकर उस चट्टान पर लगा दिया।

क्रॉस इतना बड़ा था कि अगली सुबह किनारे से ही नजर आने लगा तो फौरन हिन्दुओं ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। राज्य की सरकार बहादुर (जो #कांग्रेस की ही थी) न्यायिक जांच के आदेश दिए। जुडिशल प्रोब में कहा गया कि ये विवेकानन्द रॉक ही है इसलिए वहाँ क्रॉस लगा देना तो #घुसपैठ हुई। हंगामा चल ही रहा था कि एक रात #फ्रांसिस_ज़ेवियर भाग गए, मतलब क्रॉस अचानक गायब हो गया।

अबतक स्थिति विस्फोटक हो चुकी थी इसलिए विवेकानन्द रॉक को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित करके कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्री एम. भक्तवत्सलमने वहाँ हथियारबंद सिपाहियों का पहरा लगा दिया। मामला केंद्र की (कांग्रेस) सरकार पर फेंककर राज्य सरकार निश्चिन्त हो गयी।

केंद्र में उस समय #संस्कृति_मंत्री थे #हुमांयू_कबीर। जाहिर सी बात है कि कौम के प्रति वफादारी निभाते हुए उन्होंने मामले को अटकाया।

अबतक इस मामले में #एकनाथ_रानाडे जी का प्रवेश हो चुका था। उन्हें विवेकानन्द मेमोरियल रॉक मिशन का प्रमुख भी बना दिया गया था।

एकनाथजी को पता था कि हुमांयू कबीर का चुनावी क्षेत्र कोलकाता (तब कलकत्ता) का है। एकनाथ जी ने उनके क्षेत्र में ही खबर फैला दी कि नेता जी तो बंगाल के सबसे विख्यात सुपुत्र का स्मारक नहीं बनने दे रहे! बंगालमें हुमांयू कबीर को व्यापक विरोध के सामने झुकना पड़ा। अब हुंमायूं कबीर ने बहाना बनाया कि विवेकानन्द रॉक पर निर्माण से तो चट्टान की शोभा चली जाएगी, इसलिए उन्होंने स्मारक के नाम पर एक स्टोन टेबलेट लगाने की बात की।

इस तरह 17 जनवरी 1963 तक वहाँ केवल एक स्टोन स्लैब लग पाया। एकनाथ रानाडे इस बीच #लाल_बहादुर_शास्त्री जी के संपर्कमें थे और दोनों नेताओं ने समझ लिया था कि नेहरु के आदेश के बिना काम नहीं होगा।

तीन दिन तक एकनाथ रानाडे दिल्ली में ही रुके और विवेकानंद मेमोरियल रॉक पर स्मारक के समर्थन में उन्होंने सांसदों के हस्ताक्षर इकठ्ठा करने शुरू किये। तीन दिन के अन्दर जब वो 323 सांसदों का समर्थन जुटा लाये तब कहीं जाकर कांग्रेसी सरकार थोड़ी ढीली पड़ी।

इतने के बाद भी काम पूरा नहीं हुआ था। कांग्रेसी मुख्यमंत्री एम. भक्तवत्सलम ने इसके बाद भी केवल पंद्रह फीट बाय पंद्रह फीट का स्मारक बनाने की आज्ञा दी। एकनाथ को पता था कि इतने से काम नहीं हो सकता तो वो कांची कामकोटी पीठ के 68वें #शंकराचार्य जगद्गुरु श्री चंद्रशेखर सरस्वती महास्वमिंगल के पास जा पहुंचे। कांची पीठ के शंकराचार्य महापेरियावर ने जो 130 फीट डेढ़ इंच बाय छप्पन फीट का नक्शा सुझाया उसपर मजबूरन एम. भक्तवत्सलम माने।

इतने के बाद सवाल था कि ये स्मारक बनाने के लिए पैसे कहाँ से आयेंगे? एकनाथ रानाडे ने विश्व भर के हिन्दुओं को एक-एक रुपये का चंदा करने के लिए आमंत्रित किया और जैसे अभी राम जन्मभूमि मंदिर हिन्दुओं के दान से बना है वैसे ही विवेकानन्द रॉक पर स्मारक बना। स्वामी विवेकानन्द की 108वीं जयंती (हिन्दू पंचांग के हिसाब से) 7 जनवरी 1972 को थी और इस दिन ॐ लिखा भगवा ध्वज यहाँ फहराकर विवेकानन्द केंद्र की स्थापना की घोषणा हुई। हमें विश्वास है कि आज के कई लोग इस संघर्ष की गाथा से भी अपरिचित होंगे। स्वतंत्र भारत में भी स्वतंत्रता हिन्दुओं ने एक-डेढ़ इंच लड़-लड़ कर पायी है। विवाद हमारी आने वाली पीढ़ियों को हमारे पूर्वजों के संघर्ष की गाथाएँ सुनने के लिए अच्छा अवसर है, सुनाना भूलियेगा मत!

बंटवारे के ज़ख़्म बहुत गहरे और अनगिनत हैं। चौहत्तर साल बाद, आज भी वह ज़ख्म हरे हैं, और उनमें से रह-रह कर टीस उठती है। कई...
31/05/2024

बंटवारे के ज़ख़्म बहुत गहरे और अनगिनत हैं। चौहत्तर साल बाद, आज भी वह ज़ख्म हरे हैं, और उनमें से रह-रह कर टीस उठती है। कई घटनाएं तो ऐसी हैं, जिनको सुनकर आज भी रौंगटे खड़े हो जाते हैं, और कलेजा फटने लगता है। थोहा खालसा की त्रास्दी भी कुछ ऐसी ही है। भारत के विभाजन में लगभग बीस लाख लोगों की जानें गईं थीं। इसी दौरान पंजाब के एक छोटे से गांव थोहा ख़ालसा में एक भयानक त्रासदी हुई, जिसमें दंगाईयों से बचने के लिये कई सिख महिलाओं ने अपने जान की क़ुर्बानी दी थीं।

नरेंद्र मोदी जी ने, पिछले 9 वर्षों में भारत की बुनियादी ढांचे की कितनी विकास किया है, चलिए सुनते हैं नीति आयोग के पुर्व ...
31/05/2024

नरेंद्र मोदी जी ने, पिछले 9 वर्षों में भारत की बुनियादी ढांचे की कितनी विकास किया है, चलिए सुनते हैं नीति आयोग के पुर्व 𝐂𝐄𝐎 अमिताभ कांत जी से. यह डेटा 2023 तक का है, इसमें 2024 का डेटा शामिल नहीं किया गया है.

● पिछले 9 सालों में, भारत के तीन गुना अधिक शहरों को मेट्रो कवरेज में लाया गया है.

● पिछले 9 सालों में, पृथ्वी की त्रिज्या से 15 गुना बड़ा 92,000 किलोमीटर नये राष्ट्रीय राजमार्ग बनाये गये हैं.

● पिछले 9 सालों में, हवाई अड्डों की संख्या में 100% की वृद्धि हुई है.

● पिछले 9 सालों में, भारत के जितने भी बंदरगाह हैं, उनकी संचालन क्षमता में 100% की वृद्धि हुई है.

● पिछले 9 सालों में, 111 राष्ट्रीय जलमार्गों की पहचान की गई है और उन्हें अधिसूचित किया गया है और इनमें से कुछ जलमार्गों का संचालन भी शुरू हो चुका है.

● पिछले 9 सालों में, भारत के कुल 40,000 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइनों का विद्युतीकरण किया गया है.

● पिछले 9 वर्षों में सरकार के द्वारा गरीबों के लिए 12 करोड़ यानी 120 मिलियन नए शौचालयों का निर्माण किया गया है.

● पिछले 9 वर्षों में, भारत के महत्वाकांक्षी लोगों के लिए 5 करोड़ यानी 50 मिलियन नए घर बनाए गए हैं, जो युरोपिय देश स्पेन के प्रत्येक निवासी को एक नया घर उपलब्ध कराने के बराबर है.

● पिछले 9 वर्षों में, ब्राज़ील की जनसंख्या के बराबर 25 करोड़ यानी 250 मिलियन लोगों को अब पाइप से पानी के कनेक्शन की सुविधा उपलब्ध है.

● पिछले 9 वर्षों में 100% घरों में बिजली पहुंचाई गई है.

● पिछले 9 वर्षों में, वैश्विक स्तर की गिनती में अमेरिका के बाद भारत में दूसरी सबसे अधिक लंबाई वाली सड़क बनाई गई है.

● डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर रेल लाइन जो केवल मालगाड़ी के लिए बनाया जा रहा है. इसकी कुल लंबाई 6676 किलोमीटर है और इसकी लागत 1 लाख 24 हजार करोड़ है. इस रेल लाइन में केवल मालगाड़ी ही चलाए जाएंगे. भारत में अभी औसतन हर एक मालगाड़ी की प्रतिघंटा गती 25 से 30 किलोमीटर मीटर है. इस रेल लाइन की बन जाने से 25-30 किलोमीटर प्रतिघंटा से बढ़ाकर 100 किलोमीटर प्रतिघंटा तक हो जाएगा. और भी बहुत कुछ विकास हुआ है इन पिछले 9 सालों में. उसे लिखते लिखते कागज भी कम पड़ जाएंगे...

31/05/2024

ध्यान, साधना से भी डर रहें हैं. यह डर अच्छा है लगना ही चाहिए.

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